तलाक कोई आसान रास्ता नहीं होता। यह न्यायालय में कई चरणों से होकर गुजरता है। जानिए कैसे:
1️⃣ फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल होती है पति या पत्नी कोर्ट में तलाक की याचिका लगाते हैं। यह याचिका या तो आपसी सहमति से या किसी विवादित आधार पर होती है – जैसे क्रूरता, परित्याग, या विवाहेतर संबंध।
2️⃣ नोटिस और जवाब कोर्ट दूसरा पक्ष बुलाता है। दूसरा पक्ष अपनी लिखित आपत्ति या जवाब दाखिल करता है।
3️⃣ साक्ष्य और जिरह दोनों ओर से गवाह और दस्तावेजी सबूत पेश होते हैं। वकील जिरह करते हैं। यही प्रक्रिया सबसे ज्यादा समय लेती है।
4️⃣ मध्यस्थता का प्रयास फैमिली कोर्ट कई बार दोनों पक्षों को सुलह के लिए काउंसलिंग या मध्यस्थता का मौका देती है। अगर कोई समझौता नहीं होता, तो केस आगे बढ़ता है।
5️⃣ फैमिली कोर्ट का निर्णय (डिक्री ऑफ डिवोर्स) सारे सबूत और दलीलें सुनने के बाद फैमिली कोर्ट फैसला सुनाता है। तलाक की डिक्री जारी की जाती है।
6️⃣ हाईकोर्ट में अपील अगर कोई पक्ष फैसले से असंतुष्ट हो, तो हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। यह अपील आमतौर पर 90 दिन में दाखिल की जाती है। हाईकोर्ट पूरे मामले की वैधानिक समीक्षा करता है।
7️⃣ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अंतिम उपाय सुप्रीम कोर्ट होता है। यहाँ Special Leave Petition (SLP) दाखिल की जाती है। सुप्रीम कोर्ट तय करता है कि मामला सुनवाई योग्य है या नहीं।
समझें –तलाक एक लंबी प्रक्रिया है जल्दबाज़ी में कोई कदम न उठाएँ। सही कानूनी सलाह लें। परिवार को समय और सम्मान दें।
तलाक न सिर्फ क़ानूनी विषय है, बल्कि यह भावनात्मक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। समाज में इसके प्रति जागरूकता जरूरी है।