आर्य समाज शादी (Arya Samaj Marriage) और कोर्ट मैरिज (Court Marriage) दोनों बिल्कुल अलग-अलग चीजें…
आर्य समाज शादी (Arya Samaj Marriage) और कोर्ट मैरिज (Court Marriage) दोनों बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं।** अक्सर लोगों को यह भ्रम होता है कि आर्य समाज में शादी कर ली तो कोर्ट मैरिज हो गई, लेकिन ऐसा नहीं है।
दोनों में क्या मुख्य अंतर हैं, उन्हें आप इस तरह समझ सकते हैं:
1. आर्य समाज शादी (Arya Samaj Marriage) * **यह एक धार्मिक विवाह है:** यह पूरी तरह से वैदिक रीति-रिवाजों और अग्नि के फेरे लेकर संपन्न की जाने वाली धार्मिक शादी है।
* **कानूनी मान्यता:** आर्य समाज मंदिर से मिलने वाला मैरिज सर्टिफिकेट इस बात का सबूत तो है कि आपकी शादी हुई है, लेकिन **यह पूरी तरह से कानूनी मैरिज सर्टिफिकेट नहीं माना जाता।**
* **रजिस्ट्रेशन जरूरी है:** कानूनी तौर पर पूरी सुरक्षा पाने के लिए आर्य समाज में शादी करने के बाद भी आपको **हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act)** के तहत सब-रजिस्ट्रार (Tehsildar/Marriage Registrar) के ऑफिस जाकर अपनी शादी को रजिस्टर कराना पड़ता है।
### 2. कोर्ट मैरिज (Court Marriage)
- **यह एक कानूनी प्रक्रिया है:** इसमें कोई धार्मिक रीति-रिवाज, फेरे या पंडित नहीं होते। यह सीधे कोर्ट में मैरिज ऑफिसर (DM/SDM) के सामने होती है।
- **विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act, 1954):** यह शादी इसी कानून के तहत होती है। इसमें अलग-अलग धर्म या जाति के लोग भी बिना अपना धर्म बदले शादी कर सकते हैं।
* **प्रक्रिया:**
इसके लिए कोर्ट में पहले 30 दिन का नोटिस देना पड़ता है। उसके बाद गवाहों की मौजूदगी में मैरिज सर्टिफिकेट जारी होता है, जो अपने आप में ही अंतिम कानूनी दस्तावेज है। ### मुख्य अंतर (Quick Summary) | बात | आर्य समाज विवाह | कोर्ट मैरिज |