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𝐀𝐝𝐯𝐨𝐜𝐚𝐭𝐞 𝐑𝐨𝐡𝐢𝐭 𝐊𝐮𝐦𝐚𝐫 𝐌𝐚𝐜𝐡𝐚𝐰𝐚𝐥

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भारत में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) को कानूनन पूरी तरह वैध (Legal) माना गया है। सुप्…

भारत में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) को कानूनन पूरी तरह वैध (Legal) माना गया है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के अनुसार, अगर दो बालिग (Adults) अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं, तो यह कोई अपराध नहीं है। ​लेकिन, हर लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनन "शादी जैसा" (Relationship in the nature of marriage) नहीं माना जाता। किसी लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता और अधिकार तब मिलते हैं, जब वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता हो:

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धारा 82 भारतीय न्याय संहिता

पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दोबारा शादी करना। जो कोई भी, पति या पत्नी के जीवित रहते हुए, किसी ऐसे मामले में विवाह करता है जिसमें ऐसा विवाह पति या पत्नी के जीवित रहते हुए होने के कारण विवाह अमान्य है!

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एकपक्षीय तलाक (Ex-parte Divorce) तब होता है जब तलाक की अर्जी देने वाले पक्ष (पति या पत्नी) को अदा…

एकपक्षीय तलाक (Ex-parte Divorce) तब होता है जब तलाक की अर्जी देने वाले पक्ष (पति या पत्नी) को अदालत द्वारा तलाक की डिक्री दे दी जाती है, क्योंकि दूसरा पक्ष बार-बार समन भेजने के बावजूद अदालत में पेश नहीं होता या कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेता। ​यहाँ इसके मुख्य कानूनी पहलुओं की जानकारी दी गई है ​1. प्रक्रिया (Process) ​समन की तामील: जब एक पक्ष तलाक याचिका दायर करता है, तो अदालत दूसरे पक्ष को नोटिस (समन) भेजती है। ​अनुपस्थिति: यदि दूसरा पक्ष जानबूझकर समन लेने से बचता है या नोटिस मिलने के बाद भी अदालत की तारीखों पर उपस्थित नहीं होता, तो अदालत उसे 'एकपक्षीय' घोषित कर सकती है। ​साक्ष्य: अदालत याचिकाकर्ता के बयानों और सबूतों के आधार पर मामले की सुनवाई करती है और यदि आधार सही पाए जाते हैं, तो एकपक्षीय डिक्री पारित कर दी जाती है। #rohitkumarmachawal #highcourt #jaipur #divorce #familycourt #divorceexpert #alimony #alimonyrules #everyone #lawyer #accused #victim #law #kanun #legaladvice #divorce #divorcelawyer #adultery #jaipurdivorcelawyer #courtmaariagejaipur #divorcesolution #familycourts #divorcelawyer #police #aryasamajmandir #divorcesupport #Jaipur #Advocates https://divorcelawyersjaipur.com

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भारत में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA) की धारा 13 के तहत तलाक के मुख्य आधारों को नीचे विस्तार स…

भारत में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA) की धारा 13 के तहत तलाक के मुख्य आधारों को नीचे विस्तार से समझाया गया है: ​1. दोष के आधार पर (Contested Divorce) ​जब पति या पत्नी में से कोई एक पक्ष दूसरे पर आरोप लगाकर तलाक मांगता है: ​क्रूरता (Cruelty): शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना, जिससे साथ रहना असंभव हो जाए। ​व्यभिचार (Adultery): यदि जीवनसाथी ने शादी के बाहर किसी अन्य व्यक्ति के साथ स्वेच्छा से यौन संबंध बनाए हों। ​परित्याग (Desertion): यदि जीवनसाथी बिना किसी उचित कारण के कम से कम 2 वर्ष से अलग रह रहा हो। ​धर्म परिवर्तन (Conversion): यदि जीवनसाथी ने हिंदू धर्म छोड़कर कोई अन्य धर्म अपना लिया हो। ​मानसिक विकार (Mental Disorder): यदि जीवनसाथी असाध्य रूप से मानसिक रूप से अस्वस्थ हो। ​कुष्ठ रोग या संक्रामक रोग: यदि जीवनसाथी किसी लाइलाज या संक्रामक यौन रोग से पीड़ित हो। ​संसार का त्याग (Renunciation): यदि जीवनसाथी ने संन्यास ले लिया हो और सांसारिक जीवन त्याग दिया हो। ​जीवित न होने का अनुमान (Presumption of Death): यदि जीवनसाथी के बारे में 7 वर्ष से कुछ भी सुना न गया हो। Advocate Rohit Kumar Machawal #jaipuradvocate #divorce #familycourt #divorceexpert #alimony Jaipur family court

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